मराठी कॉर्नर सभासद

Saturday, January 23, 2010

रोना बहुत है

मोहोब्बत का गुमान होता बहुत है
के अब यह लब्ज भी रूसवा बहुत है

उदासी का सबब मै क्या बताऊ
गली कुचोंमे सन्नाटा बहुत है

तुझे मालुम तो होगा मेरी जान
तुझे हमने चाहा बहुत है

ना मिलने की कसम खाके भी मैने
तुझे हर राह में धुंडा बहुत है

यह आंखे और क्या किसीको देखें
इन आंखोंने किसीको देखा बहुत है

ना जाने क्युं बचा रख्खे है आंसू
अभी शायद मुझे रोना बहुत है

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