मराठी कॉर्नर सभासद

Saturday, January 23, 2010

दिल के जख्मोंको

दिल के जख्मोंको मै दिखांऊ कैसे
कि तेरे सितम मै दुनिया को बतांऊ कैसे

अपने दिल को अक्सर ही बहला लेते है
हम वो हुए जो खफ़ां तो अब मै मनांऊ कैसे

वो तेरी शोख अदांए वो शरारती निगांहे
तु नही तो खुद को मै अब सतांऊ कैसे

हम खुद ही मिट गये तुम्हे भुलाने से पहले
तु ही बतां तेरे अक्स को दिल से मिटांऊ कैसे

मेरे बरबादे-हाल को तो दुनिया जानती है
तेरे करम तुझको ही मै बतांऊ कैसे

तेरी यादोंके सिवा कुछ ना बचा दामन मे मेरे
अब दुनिया मे इस दौलत को में लुटांऊ कैसे

अश्कोंका समुंदर भी पीकर मैने देख लिया
इस दिलमें लगी आग को मै बुझांऊ कैसे

तुने इश्क का सिला क्या मांग लिया है जाना
अपने ही हाथोंसे तेरे जनाजो को मै सजांऊ कैसे

रोना बहुत है

मोहोब्बत का गुमान होता बहुत है
के अब यह लब्ज भी रूसवा बहुत है

उदासी का सबब मै क्या बताऊ
गली कुचोंमे सन्नाटा बहुत है

तुझे मालुम तो होगा मेरी जान
तुझे हमने चाहा बहुत है

ना मिलने की कसम खाके भी मैने
तुझे हर राह में धुंडा बहुत है

यह आंखे और क्या किसीको देखें
इन आंखोंने किसीको देखा बहुत है

ना जाने क्युं बचा रख्खे है आंसू
अभी शायद मुझे रोना बहुत है